हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , मदरसा ए फ़ातेमिया के सांस्कृतिक विभाग और इस मदरसे के बसीज-ए-तुल्लाब के सहयोग से आज मदरसे की नमाज़गाह में एक राजनीतिक एवं जागरूकता बैठक आयोजित की गई। इसमें मरकज़ी प्रांत के राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ कर्नल बियाती ने भाग लिया।
कर्नल बियाती ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आत्मसमर्पण करने की तुलना में प्रतिरोध की कीमत हमेशा कम होती है। उन्होंने कहा कि ईरानी जनता ने पिछले 47 वर्षों में अनेक कठिनाइयों का सामना किया है, लेकिन प्रतिरोध के रास्ते पर चलकर दूसरे देशों की तुलना में बेहतर परिणाम हासिल किए हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका के सामने झुकने के बाद सऊदी अरब आज उसके हितों के अनुसार काम कर रहा है। इसी तरह, यूक्रेन ने भी अमेरिका के साथ दोस्ताना संबंध स्थापित किए, लेकिन आज वह अमेरिकी हितों के अधीन हो गया है।
कर्नल बियाती ने आगे कहा कि ईरान के शहीद क्रांतिकारी नेता ने बार-बार इस बात पर जोर दिया था कि अमेरिका की समस्या केवल इस्लामी गणराज्य ईरान से नहीं है, बल्कि वह एक शक्तिशाली ईरान को अस्तित्व में नहीं देखना चाहता। उनके अनुसार, ईरान के पास मौजूद बहुमूल्य प्राकृतिक और राष्ट्रीय संसाधनों पर कब्ज़ा करना भी अमेरिका के उद्देश्यों में शामिल है। इसलिए अमेरिका पर किसी भी परिस्थिति में भरोसा नहीं किया जा सकता।
बैठक के अंत में मरकज़ी प्रांत के राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ने कहा कि ईरान के पास मजबूत और ईश्वर पर भरोसा रखने वाले मानव संसाधन, पर्याप्त एवं प्रभावी हथियार और एक सुव्यवस्थित सैन्य ढांचा है।
उन्होंने दावा किया कि इन्हीं क्षमताओं के बल पर ईरान विश्व की सबसे बड़ी शक्ति का सामना करने में सक्षम हुआ है और उसने दुनिया में उसकी शक्ति एवं प्रतिष्ठा को चुनौती दी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान ने स्वयं को दुनिया की चौथी महाशक्ति के रूप में प्रस्तुत किया है।
आपकी टिप्पणी